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मुंगेर में डिप्टी CM विजय सिन्हा का सख्त संदेश, ‘लूट की संस्कृति’ पर अब होगी सीधी चोट
- Reporter 12
- 04 Apr, 2026
मुंगेर में आयोजित बुद्धिजीवियों की बैठक में बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने पारदर्शी व्यवस्था, अवैध गतिविधियों पर सख्ती और शहर की बुनियादी समस्याओं के समाधान को लेकर प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया।
मूंगेर आलम की खबर।बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मुंगेर में आयोजित एक अहम बैठक में शासन-प्रशासन की कार्यशैली, शहर की बुनियादी समस्याओं और अवैध गतिविधियों पर खुलकर अपनी बात रखते हुए साफ संकेत दिया कि अब व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और परिणाम देने वाला बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं गिनाना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सुधार दिखाना है। इसी क्रम में उन्होंने यह भी दो टूक कहा कि “लूट की संस्कृति” को अब नियंत्रित करने का समय आ गया है और इसके लिए सख्ती से पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है।
शुक्रवार देर शाम संग्रहालय सभागार, मुंगेर में आयोजित इस बैठक में शहर के बुद्धिजीवियों, प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच विभिन्न स्थानीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक का माहौल केवल औपचारिक नहीं रहा, बल्कि इसमें शहर की वास्तविक समस्याओं, प्रशासनिक संवेदनशीलता और विकास की दिशा पर गंभीर विमर्श देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद और अपर समाहर्ता मनोज कुमार के स्वागत संबोधन से हुई। इस दौरान महापौर कुमकुम देवी, भाजपा जिलाध्यक्ष अरुण कुमार पोद्दार समेत कई प्रमुख लोग भी मौजूद रहे।
उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह साफ किया कि शासन का मतलब सिर्फ फाइलों में निर्णय लेना नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि जब सरकार किसी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में काम करती है, तो स्वाभाविक तौर पर कुछ ऐसे लोग असहज होते हैं, जो लंबे समय से ढीली व्यवस्था और अव्यवस्था का लाभ उठाते रहे हैं। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि जनता अब पहले से ज्यादा जागरूक है और वह ईमानदार काम, स्पष्ट नीयत और सख्त प्रशासनिक रवैये के साथ खड़ी है।
बैठक के दौरान मुंगेर शहर की कई ज्वलंत समस्याएं खुलकर सामने आईं। इनमें पेयजल आपूर्ति, सीवरेज सिस्टम, और खुले में मांस-मछली की बिक्री जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। इन विषयों पर चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को साफ शब्दों में कहा कि बुनियादी सुविधाओं के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही, टालमटोल या ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने विशेष रूप से नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि इन समस्याओं पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि शहरवासियों को रोजमर्रा की परेशानियों से राहत मिल सके।
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विजय कुमार सिन्हा ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी भी शहर का विकास केवल बड़ी योजनाओं से नहीं, बल्कि दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाली बुनियादी व्यवस्थाओं से मापा जाता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी शहर में पानी, सफाई, निकासी और बाजार व्यवस्था जैसे मूलभूत मुद्दे ही ठीक नहीं हैं, तो विकास का दावा अधूरा माना जाएगा। यही वजह है कि उन्होंने प्रशासनिक मशीनरी को निर्देशित किया कि स्थायी समाधान की दिशा में काम किया जाए, न कि केवल तात्कालिक व्यवस्था कर जिम्मेदारी पूरी मान ली जाए।
बैठक में अवैध खनिज परिवहन और सड़क पर चल रहे ऐसे वाहनों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। इस पर उपमुख्यमंत्री का रुख काफी सख्त दिखा। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे वाहनों के खिलाफ आने वाले समय में कड़ी और उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नियमों को तोड़कर चलने वालों को ऐसा संदेश दिया जाएगा कि वे दोबारा सड़क पर उसी तरह सक्रिय होने की हिम्मत न कर सकें। यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य के कई हिस्सों में खनिज परिवहन, ओवरलोडिंग और अवैध ढुलाई को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई चर्चा में है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार में ओवरलोडिंग पर काफी हद तक नियंत्रण स्थापित किया जा चुका है और सरकार इस दिशा में आगे भी कठोर रुख बनाए रखेगी। उनका कहना था कि सड़क सुरक्षा, सरकारी राजस्व और प्रशासनिक अनुशासन—तीनों के लिए यह जरूरी है कि सड़क पर चलने वाले व्यावसायिक वाहनों पर नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए। इस संदर्भ में उनका संदेश केवल चेतावनी नहीं, बल्कि नीतिगत दृढ़ता के रूप में देखा गया।
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अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित बिहार’ के विजन का भी उल्लेख किया और कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और बुनियादी ढांचे को मजबूत कर उसी दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा सिर्फ योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को शासन का असर जमीन पर महसूस हो। इसके लिए प्रशासन को सिर्फ सक्रिय नहीं, बल्कि उत्तरदायी और संवेदनशील भी बनना होगा।
विजय सिन्हा ने यह भी रेखांकित किया कि जनता की अपेक्षाएं अब पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी हैं और अब केवल भाषणों या बैठकों से काम नहीं चलेगा। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को यह संदेश दिया कि समस्याओं को सुनना और उनका समयबद्ध समाधान देना ही सुशासन की असली कसौटी है। इसी सोच के तहत उन्होंने यह भी कहा कि हर विभाग को अपनी कार्यशैली में पारदर्शिता और स्पष्टता लानी होगी, ताकि जनता के बीच विश्वास मजबूत हो और शासन की विश्वसनीयता बनी रहे।
बैठक का एक अहम पहलू यह भी रहा कि इसमें सिर्फ सरकारी प्रस्तुति नहीं हुई, बल्कि स्थानीय स्तर की वास्तविक समस्याओं और जनभावनाओं को भी सामने लाया गया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि सरकार अब नीतिगत संवाद को केवल ऊपर से नीचे की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जन-आधारित फीडबैक सिस्टम के रूप में भी देखना चाहती है। यही वजह है कि मुंगेर की यह बैठक केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रशासनिक संकेतों से भरी राजनीतिक और नीतिगत बैठक के रूप में उभरकर सामने आई।
अपने संबोधन के अंत में उपमुख्यमंत्री ने फिर दोहराया कि सरकार का उद्देश्य सिस्टम को ऐसा बनाना है, जहां ईमानदारी से काम करने वालों को संरक्षण मिले और गड़बड़ी करने वालों को कोई जगह न मिले। उन्होंने साफ किया कि पारदर्शिता और जवाबदेही पर अब और ज्यादा फोकस रहेगा। उनका यह संदेश न सिर्फ अधिकारियों के लिए था, बल्कि उन लोगों के लिए भी था जो व्यवस्था की कमजोरियों का फायदा उठाकर अपने हित साधते रहे हैं।
मुंगेर में हुई यह बैठक कई मायनों में अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे यह साफ संकेत गया है कि सरकार अब स्थानीय समस्याओं, अवैध गतिविधियों और प्रशासनिक सुस्ती पर एक साथ चोट करने की रणनीति पर काम कर रही है। साथ ही यह भी दिखा कि आने वाले दिनों में शहरों की बुनियादी व्यवस्था, परिवहन अनुशासन, खनिज ढुलाई और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही जैसे मुद्दे और ज्यादा केंद्र में रहने वाले हैं। उपमुख्यमंत्री के सख्त और स्पष्ट संदेश ने यह जरूर जता दिया है कि अब शासन की प्राथमिकता सिर्फ योजनाएं बताना नहीं, बल्कि जमीन पर बदलाव दिखाना है।
बताया गया है कि उपमुख्यमंत्री अपने दौरे के क्रम में भूमि सुधार जनकल्याण संवाद कार्यक्रम में भी शामिल होंगे, जहां वे आम लोगों की समस्याएं सुनेंगे और संबंधित मुद्दों पर फीडबैक लेंगे। ऐसे में मुंगेर का यह दौरा केवल एक बैठक भर नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन को जवाबदेह बनाने और जनता के बीच सरकार की सख्त कार्यशैली का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण राजनीतिक-प्रशासनिक पड़ाव बन गया है।
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